Quotes by Sarveshwar Dayal Saxena

"चिडि़या को लाख समझाओ
कि पिंजड़े के बाहर
धरती बहुत बड़ी है, निर्मम है,
वहाँ हवा में उन्हें
अपने जिस्म की गंध तक नहीं मिलेगी।
यूँ तो बाहर समुद्र है, नदी है, झरना है,
पर पानी के लिए भटकना है,
यहाँ कटोरी में भरा जल गटकना है।
बाहर दाने का टोटा है,
यहाँ चुग्गा मोटा है।
बाहर बहेलिए का डर है,
यहाँ निर्द्वंद्व कंठ-स्वर है।
फिर भी चिडि़या
मुक्ति का गाना गाएगी,
मारे जाने की आशंका से भरे होने पर भी,
पिंजरे में जितना अंग निकल सकेगा, निकालेगी,
हरसूँ ज़ोर लगाएगी
और पिंजड़ा टूट जाने या खुल जाने पर उड़ जाएगी।"
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"अक्सर एक व्यथा
यात्रा बन जाती है ।"
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Books by Sarveshwar Dayal Saxena

  • Poems
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  • 1989 by Writers Workshop
  • Hathi Ki Poon
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  • January 1st 2012 by Vani Prakashan Publisher
  • लड़ाई
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  • 2010 by Vani Prakashan

    (first published 1996)

Sarveshwar Dayal Saxena
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